मैथिली

छोट छोट पैर चलत ठुमकाई,
गुरु गृह के आश्रम सब भाई,
जाके शीश झुकाई गुरुजन ते,
लिन्हि आशीष किजे लीला आई I

गुरु गृह जे गये रघुराई,
पल में विद्या गूँथ ले सब भाई,
मुस्काई त देखन वयदेही,
इठलाई संग आर, तीन जननी I

जाने हैं सब जगत में राम के गाथा,
जाने ना कोई सिया की देन,
सिया से ही राम के अक्षर होई,
जह मिथिला सह अवध संग प्रेम I

-योशी वत्स

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